हम साथ-साथ हैं! किला बचाने निकले अखिलेश, पिता ही नहीं चाचा शिवपाल को भी लिया साथ

Uttar Praddesh Assembly Election 2022: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में तीसरे चरण के लिए प्रचार में धार देने में जुटे अखिलेश यादव के सामने चुनौती बेहद बड़ी है. अपने गढ़ और सपा का किला बचाने के लिए अखिलेश यादव ने नया दांव चला है. अखिलेश जब इटावा में प्रचार के लिए निकले तो उन्होंने पिता ही नहीं अपने चाचा शिवपाल को भी साथ ले लिया.

रथ में जहां एक तरफ मुलायम सिंह यादव बैठे तो वहीं दूसरी ओर अखिलेश यादव भी थे. सबसे खास बात ये थी कि चाचा शिवपाल भी अखिलेश के रथ में सवार हुए. तीनों ही नेता अपने समर्थकों का हाथ हिलाकर अभिवादन करते हुए नजर आ रहे थे.

2012 में जब सपा ने राज्य में सरकार बनाई, तो अपने गढ़ की 29 सीटों में से उसने 25 सीटें जीती थीं, जबकि 2017 में चाचा शिवपाल सिंह यादव के साथ अखिलेश के झगड़े के कारण उसे सपा को हार का सामना करना पड़ा और केवल छह सीटें पार्टी को मिलीं. अब, चाचा-भतीजे वोट के बंटवारे को रोकने के लिए एक साथ हैं.

सैफई से सिर्फ 4 किमी दूर है करहल

करहल इटावा जिले में अखिलेश के पैतृक गांव सैफई से महज चार किलोमीटर दूर है. यह निर्वाचन क्षेत्र मुलायम सिंह यादव की मैनपुरी लोकसभा सीट का हिस्सा हैं. अखिलेश ने विधान परिषद सदस्य के रूप में मुख्यमंत्री के पद पर कार्य किया और वर्तमान में आजमगढ़ से सांसद भी हैं. अखिलेश अपने गृह क्षेत्र से पहला विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं.

क्यों खास है करहल सीट

अखिलेश जिस करहल सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, वहां 3.7 लाख मतदाता हैं, जिनमें 1.4 लाख (37 प्रतिशत) यादव, 34,000 शाक्य (ओबीसी) और लगभग 14,000 मुस्लिम शामिल हैं. करहल सीट 1993 से सपा का गढ़ रही है. हालांकि, 2002 के विधानसभा चुनाव में यह सीट भाजपा के सोबरन सिंह यादव के खाते में गई थी, लेकिन बाद में वह सपा में शामिल हो गए.

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