छत्तीसगढ़ के कांकेर में बीते 15 सालों से आंदोलन कर रहे सैकड़ों आदिवासी ग्रामीण, ये है मांग

Protest in Kanker for last 15 years: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में पिछले 15 सालों से एक ही मांग को लेकर आंदोलन कर रहे सैकड़ों आदिवासी ग्रामीणों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है. लिहाजा सैकड़ों ग्रामीण अपनी मांग को लेकर अंतागढ़ नारायणपुर मार्ग में चक्काजाम कर बैठ गए हैं. ग्रामीणों द्वारा यह चक्काजाम बीते 38 घंटों से जारी है. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं की जाती तब तक उनका चक्काजाम जारी रहेगा.

सैकड़ों ग्रामीण कर रहे धरना-प्रदर्शन

इधर सैकड़ों ग्रामीणों के सड़क पर धरना प्रदर्शन करने से अंतागढ़-नारायणपुर मार्ग पूरी तरह से बाधित हो गया है. दरअसल आंदोलन कर रहे ग्रामीणों की मांग है कि कांकेर जिले के 58 गांव को नारायणपुर जिले में शामिल किया जाए. जिससे कि उन्हें सभी सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ मिल सके. उनका गांव कांकेर जिले के सबसे बाहरी क्षेत्र में होने की वजह से उपेक्षा का शिकार हो रहा है और गांव में कोई विकास कार्य नहीं हो रहा है. जिसके चलते सभी ग्रामीण हताश हो चुके हैं. ऐसे में वे चाहते हैं कि क्षेत्र के लगभग 58 गांवों को नारायणपुर जिला में शामिल किया जाए.

चक्काजाम में डटे रहने की दी चेतावनी

अपनी एक सूत्रीय मांग को लेकर आंदोलन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि वह साल 2007 से अपने गावों को नारायणपुर जिले में शामिल करने की मांग करते आ रहे हैं. हर बार सरकार के जिम्मेदारों द्वारा आश्वासन तो मिलता है लेकिन अब तक इस पर कोई पहल नहीं की गई है. ग्रामीणों ने बताया कि साल 2019 में भी 45 दिनों तक उनका धरना प्रदर्शन जारी रहा. जिसके बाद सैकड़ों ग्रामीण अपने गांव से लगभग 400 किलोमीटर पैदल चलकर राजधानी रायपुर पहुंचे. उन्होंने राज्यपाल से भी मुलाकात की और अपनी मांग रखी. उस वक्त भी राज्यपाल के द्वारा उन्हें आश्वासन मिला और साल 2022 जनवरी माह तक उनकी मांग पूरी होने की बात कही गई. लेकिन आज तक इस मांग को लेकर प्रशासन कोई पहल नहीं कर रहा है जिससे ग्रामीणों में काफी आक्रोश है. ग्रामीणों ने कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती वह चक्काजाम में डटे रहेंगे.

58 गांव हो रहे उपेक्षा का शिकार

इधर मंगलवार दोपहर को प्रशासन का अमला भी ग्रामीणों के पास पहुंचा और उन्हें आश्वासन भी दिया गया. लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें उल्टे पैर वापस भेज दिया. ग्रामीणों ने कहा कि अब आश्वासन नहीं उन्हें नतीजा चाहिए. बीते 15 सालों से एक ही मांग को लेकर वे आंदोलन करते आ रहे हैं. बावजूद इसके तत्कालीन बीजेपी और अब कांग्रेस की सरकार उनकी मांगों को अनदेखी कर रही है. लेकिन अब ग्रामीण अपनी मांग को लेकर डटे हुए हैं और जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती वे चक्का जाम से नहीं हटने की बात कह रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार विकास के लाख दावे करे लेकिन उनके 58 गांव तक कोई विकास कार्य नहीं पहुंचा है. ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं.

योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे ग्रामीण

उनके गांव से जिला मुख्यालय कांकेर काफी दूर होने की वजह से कोई भी सरकारी काम पूरा नहीं हो पा रहा है. इस वजह से ग्रामीण शासकीय योजनाओं का लाभ भी नहीं ले पा रहे हैं और ना ही उनका कोई काम पूरा हो पा रहा है. ऐसे में वे चाहते हैं कि नारायणपुर जिला उनके गांव से लगा हुआ है. अगर इन 58 गावों को नारायणपुर जिला में शामिल किया जाता है तो इन गांव में रह रहे सैकड़ों ग्रामीणों को राहत मिलेगी और वे भी शासकीय योजनाओं का लाभ ले सकेंगे. ऐसे में एक सूत्रीय मांग को लेकर ग्रामीण डटे हुए हैं.

इधर कांकेर के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीणों ने आवेदन दिया है और इस आवेदन पर आगे की कार्रवाई प्रशासन द्वारा की जा रही है. प्रशासन द्वारा लगातार चक्का जाम में बैठे ग्रामीणों से बातचीत की जा रही है और उन्हें हटाने की भी कोशिश की जा रही है.

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