अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में 13 साल के लंबे इंतजार के बाद मिला इंसाफ, जानिए कब क्या हुआ

Ahmedabad Blast 2008: गुजरात के अहमदाबाद में साल 2008 में सीरियल बम धमाके हुए थे. उन्हीं धमाकों में दोषी पाए गए 49 लोगों में से 38 को आज कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है जबकि 11 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई. वहीं 28 आरोपियों को सबूत के आभाव में बरी कर दिया गया. दरअसल इस मामले में कुल 77 लोगों को आरोपी बनाया गया था. इस दिल दहला देने वाली घटना में 56 निर्दोष ने अपनी जान गवां दी थी.

पीड़ित परिवारों के लिए, अदालत ने हर एक को 1 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों के लिए 50,000 रुपये और नाबालिग घायलों के लिए 25,000 रुपये का मुआवजा दिया. कोर्ट ने दोषियों पर 2.85 लाख रुपये का जुमार्ना भी लगाया. फैसला आईपीसी की धारा 302 (ए) और यूएपीए की धारा 16 (1) (बी) के तहत सुनाया गया.

आइए जानते हैं ब्लास्ट में कब-कब क्या हुआ था..

  • 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में सिलसिलेवार ढंग से 21 बम ब्लास्ट हुए थे. इस ब्लास्ट में 70 मिनट के अंदर 56 लोगों की मौत और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.
  • बम ब्लास्ट मामले में फैसला आने में 14 साल से भी ज्यादा समय लग गया. वहीं साल 2022 के 8 फरवरी को इस मामले में 49 लोगों को दोषी ठहराया गया और 28 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया. इस मामले में 78 आरोपियों में से एक सरकारी गवाह बना था. पुलिस ने दावा किया था कि दोषियों का आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से कनेक्शन जुड़े हैं.
  • आरोपियों को आईपीसी की धारा 302 (ए) और यूएपीए की धारा 16 (1) (बी) के तहत सजा सुनाया गया. इन्हें आजीवन कारावास और मौत की सजा हुई. उन पर कानून की अन्य धाराओं में भी मामला दर्ज हैं.
  • सबसे पहले इस मामले पर 2 फरवरी को फैसला आना था, लेकिन इस दौरान स्पेशल कोर्ट के जज एआर पाटले कोविड संक्रमित हो गए जिसके बाद फैसले को 8 फरवरी तक के लिए टाल दिया गया था.
  • अदालत ने ब्लास्ट में मरने वाले लोगों के परिवार वालों को 1-1 लाख, घायलों को 50 50 हजार और मामूली रूप से जख्मी हुए लोगों को 25-25 हजार का मुआवजा देने का निर्देश दिया है.
  • बम ब्लास्ट में घायल हुए लोगों में अहमदाबाद शहर के BJP नेता प्रदीप परमार भी शामिल थे जो अब राज्य सरकार ने सामाजिक एवं न्याय मंत्री बनाए गए हैं.
  • इस घटना की जांच के लिए पुलिस की एक टीम बनाई गई थी. उस दौरान पुलिस ने ताबड़तोड़ छापेमारी की थी और 19 दिन के भीतर 30 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था.

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